यह एक रविवार का दिन था। मैं टीवी पर फिल्म के प्रसारण को देख कर 2 बजे के बाद सोया था।

मेरी माँ ने नाश्ता तैयार किया था और वह स्नान के लिये चली गई थी। उसने सोचा कि मैं अपने कमरे में तैयार हो रहा हूँ। जब उसने देखा कि मैं अभी भी सो रहा हूँ तो वह बाहर आकर आश्चर्यचकित हो गई। उसने मुझे बड़ी मुश्किल से उठाया।

मैंने अपने आप को जल्दी से तैयार किया और बस स्टॉप के लिए रवाना हो गया। कोई वहाँ इंतजार करता हुआ छात्र नहीं था। मैंने एक बार सोचा कि मैं स्थानीय बस से स्कूल तक पहुंचने की कोशिश करूं , लेकिन फ़िर एहसास हुआ कि शायद ऐसा नहीं कर पाउँगा। इसलिए मैं प्राइवेट बस से जाने का निर्णय किया। मैने देखा कि बसों में भीड़ थी और कुछ यात्रियों को बाहर लटकते हुए देखकर मैं डर गया। बस में बहुत भीड़ थी और बस के अन्दर का दृश्य बहुत भयानक था। बस के अन्दर एकदम बैठने का जगह नहीं था । लेकिन मुझे स्कूल जाना बहुत जरूरी था।

मै बस के सामने वाले दरवाजे से प्रवेश किया। किसी तरह से बस में खड़ा हो गया। खड़े खड़े यात्रा करने में जिस कष्ट को झेला वह मैं कभी नहीं भूल पाया । हर पड़ाव पर नए यात्री प्रवेश करते थे और भीड़ में एक भूचाल सी अवस्था हो जाती थी । मेरा शरीर रगड़ खा खाकर परेशान हो गया था। अंत में, मेरे उतरने का स्थान आया और मैंने अपने आप को किसी तरह से बाहर की ओर झटका। बस से उतरते समय मेरे कमीज का बटन टूट गया।

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बस स्टॉप मेरे स्कूल से कम से कम आधा किलोमीटर की दूरी पर था। मैं जितनी जल्दी हो सका, भाग, लेकिन स्कूल की प्रार्थना पहले से ही शुरू हो चुकी थी। मैं देर से आने वालों के बीच में खड़ा था। जब मैंने शिक्षक से देर का कारण पूरी इमानदारी से बताया कि कल मै फिल्म का लास्ट शो देखकर देर रात्रि को सोया था , तब उन्होंने मुझे माफ़ कर दिया, और मुझे कक्षाओं में जाने की अनुमति दे दी। उस दिन मैं देर रात तक जागने का सबक सीख लिया । क्युंकी मैंने स्नान नहीं किया था ,इसलिए मेरी त्वचा में खुजली हो रही थी। उस दिन क्लास में मुझे हर समय नीद आ रही थी। जब स्कूल की बस छूट गई तो मुझे जो सजा मिली वह मैं कभी नहीं भुला पाउंगा । अब मैं कभी देर तक नहीं जागूँगा।