Essay on ‘Autobiography of a Coin’ in Hindi for Class 5th

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मैं मुंबई के पास एक टकसाल में पैदा हुआ था। मैं बारह साल का हूँ और मैं मुंबई से कोलकाता के लिए भेजा गया था। आप जानते हैं, मैं कौन हूं। लगता है, मैं एक दो रुपए का सिक्का हूँ।

मैं तुम्हें उन दीनो के बारे मे बता रहा हू जो कुछ पहले बिताया था | जब मैं बनाया गया था तो मैं चमक रहा था, लेकिन एक आदमी जो मुझे ले जा रहा था, मुझे नीचे फेक दिया |मैं दुखी था। कोई भी मुझे देखा नही और मुझे देखे बिना, वे मुझ पर पैर रखे और दूर चले गये| मेरी चमक भी जल्द ही चली गयी थी। दिन इसी तरह गुजर रहे थे और मैं उसी क्रूर तरीके से चोट खा रहा था |

लेकिन एक दिन एक लड़की की आँख मुझ पर पड़ी | उसने मुझे अपने हाथो मे ले लिया और पेंसिल बॉक्स में मुझे रखा। उसका नाम स्मिता था। यह नई जगह अच्छा, शांत, सुरक्षित और मेरे लिए बेहतर था। मैं बहुत आराम से रहता था | मैं इस बॉक्स में दो से तीन दिन बिता चुका था| जब भी स्मिता पेंसिल बॉक्स खोलती थी, मुझे मुस्कुराता पाती थी| मुझे देखने के बाद, वह अपने मन में कुछ सोच रही थी| एक दिन स्मिता को एक पांच रुपए का सिक्का मिला | वह मेरे बगल में सिक्का रखी| अब मेरे पास एक दोस्त था; जिसके साथ मैं अपनी खुशियों, अच्छी और बुरी भावनाओं और मेरे जीवन के अनुभवों को बटा करता था| वह भी मेरे साथ बहुत खुश थी। क्या आपको पता है? उसके बाद क्या हुआ?

एक दिन स्मिता स्कूल बस पकड़ने की जल्दी में मुझे रास्ते पर गिरा दिया। मुझे देखे बिना वह मुझ पर अपने पैर रखा। मैं दर्द से रो रहा था| जब वह अपना पैर हटायी| मुझे कुछ राहत मिली और कुछ सांस लिया| यह क्या बुरा दिन था | स्मिता का भाई अरुण भी था; जो शरारती था और कभी किसी की सुनता नहीं था। अरुण मुझे अपने हाथ में लिया और एक कैंडी खरीदा और मुझे दुकानदार को दिया| वह मुझे बॉक्स में रखा। वहाँ भी मेरे जैसे सिक्के थे| फिर मुझे कई दोस्त मिले और मैं खुश था| मैं उन्हें अपने बुरे दीनो के बारे मे बताया। वे भी दु: खी थे और मेरी दुखद कहानी सुनकर रो रहे थे ,जबकि कुछ मुझ पर हँस रहे थे| कुछ दोस्तों ने कहा उन पर ध्यान ना दो |

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